जय हिंद। देखिए, हम देखते हैं कि बैलस्टिक
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Iran -Israel War Update | Stand of India in Iran War | khamenei Death | Iran Drone | Iran Missile
Channel: Khan GS Research Centre
मिसाइल को कैसे अमेरिका और इजराइल काउंटर
करके मार देते हैं और कैसे इनका थर्ड और
पेट्रिएट मिसाइल काम कर रहा है और ईरान अब
तक क्यों झुकने का नाम नहीं ले रहा है।
इजराइल के पास कितने मिसाइल है इसको समझते
हैं। देखिए ये जो रडार आते हैं सब ये बहुत
महंगे रडार होते हैं सब। ये बैलस्टिक
मिसाइल को 5000 कि.मी. दूर से ही पकड़
लेते हैं। ऐसे किसी का दाम है 800 करोड़,
किसी का 8000 करोड़, 5000 करोड़। बहुत
महंगे आते हैं सब। ये एक जगह खड़ा करेंगे
और ये अलग-अलग मतलब 5000 कि.मी. पे आपको
बता देगा। 3500 कि.मी. पे मिसाइल को रेडी
कर देगा। 2000 कि.मी. पे वार्निंग दे
देगा। 100 कि.मी. के आसपास इधर रहेगा। मार
के मिसाइल मार के गिरा देगा। रास्ते में
ही गिरा देगा। तो ये रडार बहुत काम करते
हैं सब। और ये रडार कैसे काम करेगा? एक
रडार रहेगा। इसके पास कंट्रोल यूनिट
रहेगा। यह देखेगा। यह बताएगा कि मेरा जहाज
है कि दुश्मन का जहाज है या मिसाइल आ रही
है तो खेत में गिरेगी कि बिल्डिंग पे
गिरेगी। अगर खेत में गिरने वाली होगी?
उसका प्रोजेक्टाइल देख के तो छोड़ देगा।
और उसके बाद ये मिसाइल यूनिट को ऑर्डर
देगा। मिसाइल यूनिट को आर्डर देगा। ईरान
ने ना आंखें फोड़ दिया। ये लोग का रडारें
मार के फोड़ दिया। देखिए ई सारा रडार कोई
यो सस्ता नहीं है। कोई 1000 करोड़, कोई
2000 करोड़, कोई 700 करोड़, कोई 1200 करोड़,
कोई 100,000 करोड़ मारा धुआधुआ कर दिया।
आंखें फोड़ दिया। ये तो वही हाल हो गया कि
कीड़ा मारने के लिए दवाई लाए हैं। और दवाइय
में कीड़ा पड़ गया। अजब हाल हो गया। रडार का
काम था दुश्मन को देखना कि कोो मिसाइल
जहाज नहीं आ रहा है। एकरे मार के फोड़
दिया। एक वो कान के डॉक्टर के पास थे ना
तो एक कान का डॉक्टर एक मरीज से पूछा कि
क्या नाम है? तो मरीज चार बार बोला कि
अपना नाम तो कान के डॉक्टरों को सुनाई
नहीं दे रहा था। ऐसे तो ऐसे हाल है कि
रडारे मार के फोड़ दिया है वहां पे। ईरान
की जो बैलस्टिक मिसाइल्स हैं, अलग-अलग
लेवल की बैलस्टिक मिसाइल है। उसकी फतह
बैलस्टिक मिसाइल है। और इसका जो शाही
ड्रोन है ये बहुत खतरनाक है। और ये
बैलस्टिक मिसाइल अब नए पार्ट को फॉलो कर
रहे हैं। ये मिसाइल जब गिरने वाले हो रहे
हैं टारगेट पे तो उसे हम टर्मिनल फज़ कहते
हैं। टर्मिनल फज़ पे ना ये अचानक से रास्ता
बदल ले रहे हैं और रास्ता बदलने के बाद
उनकी स्पीड अचानक से जो नॉर्मल स्पीड आ
रही है अचानक से तेज हो जा रही है। इससे
घाटा क्या हो रहा है कि जो मिसाइलों को
काउंटर करने के लिए इजराइल और अमेरिका
मिसाइल मारते थे सब तो सपोज कीजिए कि इसकी
स्पीड है 1000 कि.मी. पर 1000 की स्पीड से
आ रहा है। अब ये भी काउंटर करने के लिए
1200 की स्पीड से आएगा और ये अचानक यहां
पहुंचने के बाद 2000 की स्पीड से हो रहा
है। तो ये कंफ्यूज हो रहा है। जा अब क्या
करें यहां पे? ये उल्टे गिर जा रहा है
दूसरे के शहर पे। तो ये इजराइल बहुत ईरान
बहुत खतरनाक ढंग से मार रहा है अपनी
बैलस्टिक मिसाइलों को। बैलस्टिक मिसाइल
कैसे काम करती है? ये पहले अंतरिक्ष में
जाती है। उसके बाद दुश्मन देश के ऊपर जब
आने लगती है टर्मिनल फेज में यहां बहुत
तेज एंट्री करती है और कई भाग में बट जाती
है। यहां पर इजराइल ईरान के पास ऐसे
बैलस्टिक मिसाइलों का जखीरा है। ये पूरा
अंडर ग्राउंड रखे हुए हैं अपने बैलिस्टिक
मिसाइलों को। अब इन बैलस्टिक मिसाइल में
ईंधन कैसे पड़ेगा? तो जो ईंधन है वो सॉलिड
ईंधन है। तो जिसमें बारूद रहता है सॉलिड
ईंधन ईंधन। इसको भरने के लिए कोई झमेला
नहीं है। रखा हुआ है रेडी तो मूव है। सबसे
तेजी से हमला करता है सॉलिड इंजन। जो ईंधन
भरा होता है उसको रेडी करने के लिए झमेला
नहीं है। जैसे दिवाली का रॉकेट है वैसे
उड़ा देना होता है। और इसको ये क्या किया?
अंडरग्राउंड जमीन के नीचे रखा है। अचानक
ऊपर से जमीन खुलती है। मार के वो बंद हो
जाता है। पता ही नहीं चलता है कहां है। तो
दिन के समय वो सॉलिड फ्यूल वाले रॉकेट से
मारता है। और इस सॉलिड फ्यूल वाले से
मारता है। रात के समय वो लिक्विड फ्यूल का
यूज़ करता है। लिक्विड फ्यूल में क्या है
ना कि पहले उसमें फ्यूल भरना होता है। फिर
उसमें ऑक्सीडाइजर भरना होता है। तो इसमें
दो-ती घंटे का टाइम लग जाता है और उसके
बाद उसको मारता है। अब इसमें एक समस्या
क्या है कि जब हम इसे किसी मोबाइल लांचर
से या किसी ट्रक से ले जाके और जगह पे
मारेंगे ना तो इजराइल के पास और अमेरिका
के पास एयर सुपीरियरिटी है। वो उसके ड्रोन
वगैरह पूरी इजराइल ईरान के ऊपर घूम रहे
हैं। तो ये मार के गिरा देते हैं। इसीलिए
बचने के लिए अगर उसने लिक्विड का यूज़ कर
रहा है तो रात में मार रहा है और दिन में
वो सॉलिड फ्यूल से मार रहा है। भयानक लेवल
का ले जा रहा है। और इजराइल के इजराइल और
अमेरिका के स्टॉक पाइल्स अभी कम हो रहे
हैं। लेकिन ईरान के पास पूरा जखीरा भरा
है। चाहे वो ड्रोन हो या उसके पास मिसाइल
हो बैलस्टिक मिसाइल का पूरा जखीरा भरा है
और प्रतिदिन वो 500 ऐसे ड्रोन और मिसाइल
बना रहा है पर डे के हिसाब से ये सबसे
बड़ा खतरनाक बात है और इजराइल के सॉरी
ईरान के पास सबसे जबरदस्त जो है वो
क्लस्टर मिसाइल आ गया है। क्लस्टर मिसाइल
क्या होता वो सिंगल मिसाइल होता है लेकिन
उसके अंदर छोटे-छोटे बम भरे होते हैं। जब
ये जाता है क्लस्टर मिसाइल दुश्मन की
टेरिटरी में पहुंचता है तो इसका बा आउटर
केसिंग खुल जाता है और छोटे-छोटे भाग में
बहुत ज्यादा बंट जाता है। अब ये तुरंत भी
फट सकते हैं, दो दिन बाद भी फट सकते हैं।
2 साल बाद भी फट सकते हैं। ये बहुत खतरनाक
होता है। अमेरिका और इजराइल की यही कमजोरी
है। हम एक साल पहले भी बोले थे क्लस्टर
बर्म इनकी कमजोरी है। लेकिन इन पर
उन्होंने बैन लगा रखा है। लेकिन यह
टेक्नोलॉजी रूस और चाइना से लेके ईरान
इनके ऊपर हमला कर रहा है क्लस्टर मिसाइल
से। इतना ही नहीं जिस बिल्डिंग में
अमेरिका के राजदूत रुके थे सब जिसके उसके
कमांडर रुके थे सब किस फ्लोर पे रुके थे
सब ये भी जानकारी ईरान के पास थी और ठीक
उसी फ्लोर पे जाकर हमला हुआ है और मरे हैं
सब अमेरिका के कमांडर सब ये सारी जानकारी
रूस प्रोवाइड कर रहा है क्योंकि इससे पहले
ही उन लोग के अंडर ये कंप्रहेंसिव ये जो
कंप्रहेंसिव ट्रीटी हो चुका था। ईरान ने
बहुत सारे ड्रोन दिए थे रूस को और रूस
पिछले तीन साल से इन ड्रोन से शाही
ड्रोनों के कॉपी करके खुद का ही बनाया और
यूक्रेन के ऊपर मार रहा है। तो रूस को
बहुत अनुभव है कि मिसाइलों इन ड्रोनों की
क्या कमजोरी है? इन ड्रोन को सही इस्तेमाल
कैसे किया जा सकता है। लेकिन जब दोनों में
समझौता हुआ था तो ईरान ने कहा था कि हम
ड्रोन जरूर देंगे आपको। बदले में आप हमें
क्लस्टर और मिसाइलों की टेक्नोलॉजी दीजिए।
साथ में हमारे ड्रोन का जो वहां इस्तेमाल
कर रहा है उसका डाटा भी दीजिएगा कि कहां
स्पीड बढ़ाने की जरूरत है। ठंडे मौसम में
काम कर रहा है कि नहीं। गर्म मौसम में काम
कर रहा है। तो पिछले 3 साल से रूस जो लड़
रहा था उसका पूरा अनुभव ड्रोन का अनुभव
ईरान के पास है। अमेरिका में ट्रंप पगलाया
हुआ है वाइट हाउस में इसके लिए दुआ किया
जा रहा है। सब दुआ मांग रहा है सर ट्रंप
भाई तुमने ईरान को हल्के में ले लिया
क्योंकि इनकी जो पेट्रियट मिसाइल है जो
ड्रोन को मार के गिरा रही है। मिसाइल को
मार के गिरा रही है। 36 करोड़ की एक
मिसाइल है। और ये मिसाइलों की संख्या भी
एकदम घम कम हो गई है। क्योंकि यही मिसाइल
इन्होंने यूक्रेन को दे रखा है। पिछले 3
साल से पिछले 3 साल से ईरान इजराइल को दे
रखा है गाजा से लड़ने के लिए फ्रॉड मिसाइल
है इसकी भी संख्या कम हो गई है और दूसरा
कि ये एक साल में 700 मिसाइलें बना सकते
हैं ये लोग 700 यानी सोचिए अगर इसकी
संख्या कम हुई और ये युद्ध एक दो महीना भी
घच गया तो इनके पास तब वो क्षमता नहीं
बचेगी काउंटर अटैक करने का इसीलिए इसको
दुआ मांगा जा रहा है ट्रंप को कि ट्रंप के
ऊपर से नजर गुजर उतर जाए भालू से फुकवा ले
ट्रंप भालू से फुकवा ले हमारे यहां भालू
से फूंक दिया जाता है। वैसे भी उघारे तुम
घूमता हैस्टीन फाइल में। भालू उघारे ही
फूंकता है। तो आ जाओ यहां पे भी उघारे
फूंकवा दिया जाएगा भालू से। भालू भाई फूंक
देना इसको। हालांकि भारत और रूस के पहले
से अच्छे संबंध हैं और ईरान से भी अच्छे
संबंध हैं। हमने भी बहुत हमारी कंपनी ने
भी शेषनाक ड्रोन बनाया है जो शहीद ड्रोन
से काफी बेहतर है। और हमारा आकाश तीर
सिस्टम ये तो बहुत बेहतर आकाश एयर डिफेंस
सिस्टम है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के टाइम
देखा था कि एक भी पाकिस्तानी ड्रोन।
हालांकि तुर्की ने भी पाकिस्तान को ड्रोन
दिया था तो भारत ने उन सारे ड्रोनों को
न्यूट्रलाइज कर दिया था। अब देखिए ईरान जो
है ना दिन प्रतिदिन एडवांस होते जा रहा
है। ये दुनिया का सबसे एडवांस ड्रोन माना
जाता है एम9 रिपर। ये एनq9 रिपर जो ड्रोन
है दुनिया का सबसे एडवांस ड्रोन माना जाता
है। ये घंटों उड़ान बढ़ता है। सर्वालंस
करता है। मिसाइल मार देता है यहां पे।
ईरान ने इन ड्रोनों को भी मार दिया है। और
मारने के अलावे बकायदा रडार फोटो भी रिलीज़
किया है कि देखिए हमने कैसे मार के गिराए।
और इसके बाद इसकी टेक्नोलॉजी ईरान अब दे
देगा। या तो खुद बनाएगा या फिर रशिया और
चाइना को भेज देगा यहां पे और इतना ज्यादा
ऊसी से कॉपी करके ईरान का भी ये हमलावर
ड्रोन है। यही हमलावर ड्रोन जो है ये
अमेरिकी की नौसेना पे हमला करने के लिए
रेडी है। यही कारण है इन्हीं ड्रोनों के
बचने के लिए अमेरिकी नौसेना का अब्राहम
लिंकन वायुयान जो युद्धपोत है वो ईरान से
300 कि.मी. दूर खड़ा है। और इसने अटैक
करने की भी कोशिश भी किया था। हालांकि सफल
नहीं हो पाया। और इतना ज्यादा ईरान का खौफ
है कि ये लोग अपने तीन गो जहाज मार के
गिरा दिए रडार पे। कहीं ईरान का नहीं ना
मारो जल्दी मारो यहां पे मार के गिरा लिया
है सब ईरान बचने के लिए क्या किया है वो
हेलीकॉप्टर ये नहीं है ये गुब्बारा है
बड़े साइज का इसको भर दिया है गुब्बारा को
और यहां लूनरबर्ग लेंस लगा दिया ये
लूनरबर्ग लेंस किसी चीज को बहुत बड़ा करके
दिखाता है और रडार को कंफ्यूज कर देता है
तो ओरिजिनल दिखने लगता है तो ये जहाज
ओरिजिनल दिख रहा था हेलीकॉप्टर इस पे
मिसाइल मार दिया करोड़ों का मिसाइल बर्बाद
कर दिया यहां इसने अपने फाइटर जहाजों की
पेंटिंग बना रखी थी इसने क्या किया उस
पेंटिंग वाले जहाज पे मारा35 पाइप ले आके
मिसाइल और पूरा जहाज उड़ा दिया। F14 उड़ा
दिया। ये सब पेंटिंग रखा हुआ है। चाहे जो
भी हो सच मारा एकदम सटीक एकदम बीच में
मारा है। एकदम पेंटिंग है तो क्या हुआ?
मारा एकदम बरियारे एकदम बीच में है।
हालांकि ऐसा नहीं है कि सारे ही चीजें
अमेरिका और इजराइल के मिस हो रहे हैं।
अमेरिका और इजराइल ने मारा भी है। अमेरिका
और इजराइल ने मिलकर इसके F14 जो जहाज खुद
1970 के दशक में अमेरिका ने ईरान को दिया
था। बाद उस समय अमेरिका और ईरान में
दोस्ती बाद में खमैनी के आने के बाद
दोस्ती दुश्मनी में बदल गई थी। तो उस समय
के ये F14 जहाज उसके पास थे। उसको मार के
इन्होंने गिरा दिया है। इसके अलावे एक
बहुत पुराना ईरान का याक जहाज था जो
ट्रेनर था। इसको मार के गिराया है इजराइल
ने। दुनिया के सबसे आधुनिक जहाज F35 से।
मतलब समझिए क्या है? ट्रक से टेमो स्कूटर
को कच दिया यहां पे। युद्ध में ये सब चीज
नहीं देखी जाती है। जिसके पास हथियार है
वही जीतेगा जिसके पास ताकत है। ईरान ने एक
बघेरी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाया था। यह
कंटेनर जहाज था। इस पे ड्रोन और
हेलीकॉप्टर के लिए गया था। इसको अभी मार
के डूबा दिया। अमेरिका अब इस अमेरिका और
इजराइल एयर सुपीरियरिटी पे चल रहे हैं।
क्योंकि इजराइल की एयरफोर्स बहुत वीक है।
इजराइल का एयर डिफेंस डूब चुका है। तो
बहुत ज्यादा बम्बार्डमेंट कर रहे हैं।
ईरान के तो पूरी नौसेना को इन लोगों ने
अमेरिका ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया
है। पर्ल हारबर बना दिया ईरान को। हालांकि
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी मिसाइल और
उसके अलावे उसके पास जो स्टॉक पाइल है सब
ईरान जो था अपने पड़ोसी देशों के ऑयल
रिफाइनरी पे बम मार रहा था। अभी तेहरान
में दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डिपो पर
इजराइल और अमेरिका ने स्ट्राइक किया है और
वहां लपटे पूरी आग की पूरी ऊपर तक फैल गई
है। नालियों में जो नालियों में पेट्रोल
बह रहा है ना उसमें आग पकड़ लिया है। पूरा
प्रदूषण हो गया है। अब कोई ठीक नहीं है कि
ईरान अपने पेट्रोल का कुआं समुद्र में खोल
देगा और पूरा समुद्र प्रदूषित होता है। कह
देगा ईरान इजराइल ने तो मारा है। अमेरिका
ने मारा है। तो ई भी होगा। इससे बहुत
ज्यादा प्रदूषण होगा। पूरी समुद्र में
लाइफ बर्बाद हो जाएगी। वायु प्रदूषण की तो
धज्जी उड़ रखा है। पूरी दुनिया में भयानक
तबाही आ रहा है। लेकिन हम लोग को दिवालीय
से ढेर दिक्कत हो जाएगा। सच बात तो नहीं
दिमाग जला के रख देता है। सब बताइए पूरा
युद्ध कर रहा है। सब को पर्यावरण की चिंता
नहीं है। दिवाली हम तो मनाएंगे हम अभी ये
बता दिए एकदम इजराइल तरह से बम मारेंगे।
अब दिवाली में हम पूरा भयंकर 10 लाख पेड़
लगा देंगे। उसके बदले में हम अभी बोल हम
10 लाख पेड़ लगाएंगे। लेकिन विश्व शांति
के लिए हम भी दिवाली में भयानक मारेंगे।
यहां तो अमेरिका वगैरह सबको कुछ पर्यावरण
और की चिंता नहीं है। लेकिन समझिए ध्यान
से इजराइल की इसके पीछे चाल क्या है?
इजराइल जो है वो ईरान को काउंटर करने के
लिए अमेरिकी नौसेना को यहां फंसा दिया है
कि मारो तुम अब अलग-अलग जो आपने सैन अड्डा
रखे हैं वहां से ईरान को मारो और इजराइली
सेना टैंक लेकर रेडी है लेबनान पर कब्जा
करने के लिए। लेबनान पे कब्जा करेगी।
सीरिया पे भी आधा कब्जा कर ही लिए। वो
गोलानाइट वगैरह सब कब्जा कर लिया। क्योंकि
इजराइल को ग्रेटर इजराइल बनना है। पूरा
लेबनान कब्जा करना है। पूरा सीरिया आधा
इराक कर ना करना है। आधा सऊदी सऊदी अरब
कब्जा करेगा। यहां तक कब्जा करेगा। तो ये
है ग्रेटर इजराइल। तो इजराइल ग्रेटर
इजराइल की ओर बढ़ चुका है। लगभग 10 या 12
अप्रैल से 10 या 12 अप्रैल से ये लोग हमला
करना चालू करेंगे। लेबनान के ऊपर हमला
करेंगे। उसका एक रीज़न भी इन्हें ग्रेटर
इजराइल बनना है और नेतनिया की सरकार बहुमत
की सरकार नहीं है। वह बहुत जल्दी उसका
गठबंधन टूट के गिर सकता है। इसलिए वह
चाहते हैं कि युद्ध में उलझे रहे। कोई
सरकार पे सवाल नहीं उठेगा। युद्ध की
स्थिति होती है तब तो यह उनका आगे का है।
तो इस पे ना ई बैलेंस बुझ नहीं पाया है।
इसका एस्टीन फाइल में इ नंगटे फोटो रख
लिया है। ट्रंप का नंगटे फोटो रख लिया है
ये एस्टीन फाइल में। अब ये ट्रंपा पगला
गया है। ए भाई क्योंकि दिखाइयो मत पूरा
हमारा इज्जत बर्बाद हो जाएगा। तो कहा कि
हाफ पेंट वाला दिखा देते हैं। वो नंगटे
वाला रख लिया। अब यह जहां-जहां इज़राइल बोल
रहा है वहां वहां यह बम मार रहा है। इसका
लड़ाई ईरान से था ही नहीं और उसको मारे
फिर रहा है और इधर इज़राइल जो है वो लेबनान
पे कब्जा करने को तैयार है। ये बात
अमेरिकी भी समझ रहे हैं। इसलिए अमेरिका के
संसद में ही इसका विरोध हो रहा है।
अमेरिकी मरीन कमांडो ने पूरा विरोध किया
कि क्यों ईरान में जा रहे हो? ये अमेरिका
की लड़ाई नहीं है। ये इजराइल की लड़ाई है।
तो इसको घी के ले गया। का हाथ टूट गया है।
ईरान का अमेरिका का दोष स्पेन भी अमेरिका
का साथ छोड़ दिया है। ब्रिटेन भी अपनी
एयरवेस यूज़ करने नहीं दे रहा था। तो बाद
में ट्रंप घुसिया गया। तो कहा है ठीक है
भाई बी बी1 लेंसर जहाज के लिए यूज़ कर
सकते हो। अमेरिका का कहना है देखिए कितना
बदतमीज इंसान है ये अमेरिका। कह रहा है कि
खामनी की तो हत्या मार के मार दिया इसने।
कहा कि अब इनका जो उत्तराधिकारी आएगा उसको
चुनने का अधिकार अमेरिका को है। बताइए
कितना बेशर्मी है। माने किसी देश का
उत्तराधिकारी अमेरिका चुनेगा। इसको क्या
लगता था कि खामेनी को मार देंगे तो ईरान
ध्वस्त हो जाएगा। वेनेजुएला समझो ईरान को।
ईरान ने ऐसा नहीं करेगा। खामेनी अब इन्हें
पहले से पता था कि अमेरिका ऐसा करेगा।
इसलिए ये पहले से तैयार बैठे थे। तो
खामेनी ने क्या किया था? एक बहुत खतरनाक
डिवीजन बनाया था। डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक
डिफेंस। डीएमडी डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक
डिफेंस जो इन्होंने बनाया था। ये क्या था?
इस इन इसका था कि ईरान को 31 टुकड़ों में
इन्होंने तोड़ दिया था। 31 टुकड़ों में
तोड़ दिया और कहा गया कि अगर तेहरान
ध्वस्त भी हो जाता है। टॉप लीडरशिप मारी
जाती है। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति टॉप
लीडर सेनापति मारे जाते हैं तो उससे कोई
मतलब नहीं है। 31 का 31 डीएमडी ब्रिगेड जो
है उसके पास अपना मिसाइल है, अपना ड्रोन
है, अपने जहाज है, अपनी सेना है, वो सब
मारेगी 3100। इसलिए ईरान की टॉप लीडरशिप ढ
चुकी है। लेकिन जो 31 के 31 जो
डिसेंट्रलाइज मोश डी डिफेंस थी डीएमडी थी
वो अंधाधुंध मार रही है। जिसको कुवैत मिल
रहा है यहां से कुवैत को मार रहा है।
जिसको यूएई मिल रहा है वो यूएई मार रहा
है। क़तर मार रहा है। बहरेन मार रहा है।
इरिया तुर्कमेनिस्तान जहां मन अज़रान जहां
मन वहां मार रहा है। सब अब ईरान पगला गया।
एकदम जहां मन वहां मारना है। क्योंकि टॉप
लीडरशिप खत्म हो चुकी है। और डीएमडी को
बनाया ही गया था कि अगर टॉप लीडरशिप ख़ हो
गई तो तुम लोग अंधाधुंध मारना। और इसकी 31
ब्रिगेड तैयार है। ईरान के अंदर बैठी है।
ईरान के पास सबसे खतरनाक चीज क्या है?
उसके पास छोटे साइज की पनडुबी है। ये बहुत
बड़ी पडुबी नहीं है। इसमें 10-15 आदमी ही
अट पाते हैं। बहुत छोटी पनडुबी है। लेकिन
जो हारमोस जलसंध है वहां का पुथला पानी
है। वहां बड़ी जहाजें नहीं आ सकती है और
ना ही बड़ी पनडुबी आ पाएगी क्योंकि चट्टान
है। ये चट्टानों के पीछे छुप जाएंगे सब।
और ये जब अमेरिकी नौसेना पास आएगी तो उसे
मारेंगे सब। इसके अलावे ईरान के पास एक
मच्छर ब्रिगेड है। अभी मच्छर ब्रिगेड क्या
है? तो छोटे-छोटे लेकिन बहुत तेज गति से
चलने वाले इसके पास 15,000 से ज्यादा
जहाजें हैं। पानी वाली जहाज बहुत छोटी है।
इसका इसका आकार जो है वो एक बस के आकार का
है और उतने ही लंबाई में है। ट्रैक्टर
बराबर होगी यहां पे। लेकिन इतनी तेज स्पीड
है, इतनी तेज स्पीड है कि इसको मारना बड़ा
मुश्किल हो जाता है और वैसे भी पानी
समुद्र में निशाना लगाना बड़ा मुश्किल
होता है कि समुद्र ऊपर नीचे हो रहा होता
है और जिसमें आपकी जहाज है वो भी
डिसबैलेंस हो रही होती है। तो इनका क्या
है कि ये लोग उसको एज ए एक साथ दो चार 100
छोड़ देंगे और उस पे से ये मिसाइल छोड़
देंगे। अब दुश्मन का जहाज कंफ्यूज हो
जाएगा कि भैया इन मिसाइलों को मारे कि इन
जहाज को मारे। ये मिसाइल भी गति कर रहा
है, जहाज भी मूवमेंट कर रहा है, समुद्र भी
मूवमेंट कर रहा है। तो कंफ्यूजन हो जाएगा।
कोई ना कोई उस जहाज पे जाकर लग जाएगा। अगर
नहीं लगा तो ये कामाकाजी होंगे। ले जा के
अपने आप को उसमें लड़ा देंगे और ये खत्म
हो जाएगा। यही वजह है कि अभी तक ना इजराइल
ना अमेरिका की नेवी आगे आई है इस चीज को
खत्म करने के लिए। क्योंकि इनके पास मच्छर
ब्रिगेड है। ईरान को तबाह करने के लिए
अमेरिका सबसे घटिया और नीच काम करने जा
रहा है। वह ईरान के ऊपर के कुर्द लोगों को
कुर्द एक कबीला है वहां पर। उन लोगों को
इजराइल और अमेरिका हथियार दे रहे हैं और
पैसा दे रहे हैं। और पूरी ये जितनी
गाड़ियां हैं देखिए ट्रक व्हीकल्स,
इम्युनिशंस, फ्यूल, हथियार, पैसा,
इंटेलिजेंस, सीआईए पूरी मदद कर रही है इन
लोग की। कि मोसाद पूरी मदद कर रहा है और
इन लोगों को अपने हथिया गोदामों में भरे
हथियार को पूरा सप्लाई किया जा रहा है कि
ऊपर कुर्द इन कुर्द को सीरिया से लाया जा
रहा है ईरान के पास क्योंकि सीरिया में
सरकार गिरा दिए हैं सब ये सब इराक में
सरकार गिरा दिए हैं सब तो अब ये कुर्द
कहां चला गए हैं ऐसे इराक के कोना पे अब
यहां से पूरे ईरान में ये फैल जाएंगे सब
और पूरा आतंक मचा देंगे सब अभी आपको नया
आतंकवाद सुनने को मिलेगा कुर्दिश टेररिस्ट
अब ये बताइए आतंकवादी गलत है सब लेकिन
आतंकवादियों के हाथ में जो बंदूक है वह
बंदूक बनाने वाला अमेरिका गलत नहीं है।
आतंकवादी गलत है सब लेकिन आतंकवादियों के
पास से हथियार जो अमेरिका है वह गलत नहीं
है। अमेरिका का हथियार कैसे चलाया
आतंकवादियों के पास? तो नियम यह होना
चाहिए कि यदि कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है
तो वो जिस देश का है उस देश पे भी
प्रतिबंध लगना चाहिए और उसके हाथ में जो
हथियार है वो जिस देश का बना है वह देश भी
प्रतिबंधित होना चाहिए। देखिएगा सबसे
ज्यादा हथियार 99% हथियार अमेरिका के बने
होते हैं हर एक आतंकवादियों के पास। चाहे
वो भारत के नक्सलाइट हो, चाहे कश्मीर में
इंसर्जेंसी हो, चाहे अजमल कसबुआ हो, चाहे
ओसामा बिल्लादेन हो, तालीबान हो, आईएसआईएस
हो, सबको हथियार यही प्रोवाइड करते हैं।
लेकिन इन लोग के ऊपर कोई उंगली नहीं उठा
सकता है। सोचिए अमेरिका जहां जा रहा है,
ये जो काम कर रहा है यहां युद्ध के बाद एक
आतंकवादी पनपेंगे सब। अमेरिका ने यही तो
किया था। इराक में उसने आईएसआईएस
आतंकवादियों को पैसा दिया और पूरा जब अमेर
चला गया तो वहां से आए आ गए सब। रूस को
मारने के लिए ओसामा बिनयादन को ट्रेनिंग
दिया, हथियार दिया। उसके बाद अलकायदा
तैयार हो गई। तालीबान को किसने तैयार
किया? अमेरिका ने तैयार किया। इन सारे
आतंकवादियों को हथियार, पैसा, सीआईए की
ट्रेनिंग सब किसने दिया था? अमेरिका ने
दिया था। अब अमेरिका कुर्दिश को तैयार कर
रहा है। और इतना ही नहीं स्टैंडर्ड देखिए।
कुर्दिश फोर्सेज मतलब ये आतंकवादी नहीं अब
ये फोर्स है। मतलब ये अभी सेना है। किस
देश की सेना है? किसी देश की नहीं। तो ले
भैया तो हमारे देश के नक्सलाइटो कहेंगे कि
फ़ है भैया। हम भी मतलब इनको सेना और जब ये
ईरान पे खत्म कर देंगे तो ये भारत के लिए
खतरा बनेंगे सब। अभी यह आतंकवादी क्योंकि
अमेरिका दूर है वहां जाना मुश्किल है। हम
लोग के लिए खतरा बनेगा। वर्ल्ड ऑर्डर
शिफ्ट हो रहा है। देखिए 11 मार्च से ईरान
क्या करेगा? जितने मिडिल ईस्ट के देश हैं
उनके पास पीने का पानी नहीं है। तो उनके
पास डिसलिनेशन प्लांट है। इन डिसलिनेशन
प्लांट के ऊपर ये अपने ड्रोन से हमला करके
इसे तबाह करेगा। और अगर यहां पे आतंकवाद
जैसी घटना पनपी या फिर मानवता लांघने का
काम ईरान ने किया तो इन ड्रोनों के अंदर
कुछ नहीं करना इसे। केवल पारा भर देना है।
पारा यानी मरकरी ये सब हम लोग देखे होंगे
थर्मामीटर में होता है। बुखार नापने वाले
थर्मामीटर में पारा होता है। अगर यह पारा
पानी में मिल गया तो पानी जैसे हम पिएंगे
या वो पानी खेत में जाएगा। पेड़-पौधे उसे
सोखेंगे उससे सब्जी या फल बनेगा। उसे जैसे
हम खाएंगे तो वो पारा हमारे ब्लड के थ्रू
ब्रेन में चला जाएगा और हमें एक बीमारी हो
जाएगी। मिनीमाता बीमारी जापान में गलती से
पारा के रिसाव से बहुत भयानक फैला हुआ था
और पूरे शरीर में लकवा मार देता है। हिलता
ही नहीं। पैरालाइसिस हो जाता है। पूरा
शरीर दिमाग काम नहीं करेगा यहां पे। तो जो
इसने डिसलिनेशन प्लांट पे मारा है उसमें
पारा भर के मारेगा तो बचा हुआ डी मान के
चलिए इधर का डिसिलिनेशन प्लांट उड़ गया तो
यहां का पानी सप्लाई बंद होगा। यहां का तो
चालू होगा लेकिन दूसरा पारा मार देगा तो
गेहूं का पिया नहीं बनेगा। तो जो डायरेक्ट
गया वो गया इनडायरेक्ट गया वो भी गया। तो
ये बहुत भयानक मारने वाले हैं सब यहां पे
और ये लगभग मारना चालू करेगा 11 मार्च से
जितने भी लोग इनके पास पानी नहीं है ना
कुवैत के पास है ना अरब के पास है ना
बहरेन क़तर यूएई ओमान इराक किसी के पास
पानी नहीं है मार को तबाह कर देगा ईरान के
पास भी उतना पानी नहीं है लेकिन वो तो मर
रहा है उसके सुप्रीम लीडर को मार दिया गया
तो क्या करेगा किसी भी देश का श्रीलंका के
राष्ट्रपति को ही मार देगा तो श्रीलंका का
आदमी क्या करेगा बांग्लादेश के राष्ट्रपति
को मार देगा तो क्या करेगा हमारे भारत के
राष्ट्रपति को कोई किडनैप कर दे या मार दे
तो क्या करेगा सब जाना चल चल के बड़ी मार
मारेंगे हम लोग बिहारी सबसे आगे रहता है
सब में दुनिया में किसी को यह पता नहीं है
कि युद्ध क्यों हो रहा है। इजराइल क्यों
मार रहा है इसको? अमेरिकी नौसेना क्यों
मार रही है? किसी को पूछिए क्यों मार रहा
है? हमारा नहीं पता है। क्या ईरान के पास
एटम बम है? नहीं। एटम बम नहीं है। अमेरिका
ने बी टू स्पिरिट से 5 महीना पहले ही बम
मार के गिरा दिया था। कहा था कि सारे
न्यूक्लियर साइड खत्म कर दिए हैं। तो नहीं
है। पता है। क्या ईरान ने आक्रमण किया है?
तो नहीं किया है। क्या किसी तरह का
अग्रेशन दिखाया है? नहीं दिखाया है। क्या
कोई प्रवोक किया है युद्ध के लिए? नहीं। ई
लोग क्या किया है? खुद जाके मिसाइल मारा
है। खुद उस पे हमला किया है। उसके ऊपर 14
टन का बम गिरा दिया है। सेंक्शन लगा दिया
है। प्रतिबंध लगा दिया। उसका तेल बिकने
नहीं दे रहे हैं। से उसका नोट चलने नहीं
दे रहे हैं। से उसकी करेंसी बर्बाद कर
दिए। वहां महंगाई इतनी भयानक हो गई है।
फिर भी वहां की जनता अभी उतना विद्रोह
नहीं किए जितना ये लोग चाह रहे थे। किसी
को नहीं पता चल रहा है। यही रीज़न है कि
खुद इसका अमेरिका का विरोध हो रहा है। रूस
ने विरोध किया। खैर रूस और चाइना तो
नेचुरल दुश्मन है। लेकिन स्पेन अमेरिका का
साथी होते भी विरोध कर रहा है। अमेरिका
ब्रिटेन भी विरोध कर रहा है। फ्रांस भी
विरोध कर रहा है। सिक्योरिटी काउंसिल में
भी जब ये मैटर गया इवन जब 1945 में
यूनाइटेड नेशन ऑर्गेनाइजेशन की गठन हुई
थी। इसने कहा था कि हम तृतीय विश्व युद्ध
नहीं होने देंगे। तो इसके संविधान को
चार्टर्ड कहते हैं। तो इसके संविधान
अर्थात चार्टर्ड दो में लिखा गया है कि
कोई देश किसी दूसरे देश की संप्रभुता में
हल मतलब कोई किसी प्रकार का खलल नहीं
करेगा। दूसरे देश की संप्रभुता या जमीन
नहीं कब्जा करेगा। दूसरे देश पर हमला नहीं
करेगा। लेकिन खुलेआम चल रहा है। ये नियम
कानून गरीब देशों के लिए होता है। अमेरिका
और वेस्टर्न कंट्री का कहना है कि ईरान
अपने यहां महिलाओं पे अत्याचार करता है।
मतलब वही वेस्टर्न कंट्री जो महिलाओं को
नंगे घुमाते हैं। सब वही वेस्टर्न कंट्री
जोन फाइल में छोटी-छोटी बच्चियों का रेप
करते हैं। काट के खा जाते हैं सब। हमारे
यहां अब हमें मीडिया बाप रे बाप भारत के
लिए सबसे बड़ा खतरा है। गृह युद्ध कराएंगे
सब मीडिया। सब न्यूज़ चैनल पे बैठी
कन्याओं को कुछ नहीं दिखता है। तबाह कर
देंगे सब पूरे घर द्वार को यहां पे। इसके
हिसाब से न्यूज़ चैनल के लोगों के हिसाब
से खमैनी खराब है क्योंकि इन्होंने बहुत
अत्याचार किया है। लेकिन ट्रंप के खिलाफ
एक बात नहीं निकलेगा इनसे। खमैनी खराब है।
लेकिन भैया ये ट्रंपवा उघारे नाच रहा है।
एक तो बोलो। तुमको कोई मतलब नहीं है अपने
देश के लिए डिक्टेटरशिप क्या किया उससे
मतलब हम लोग को नहीं है। इसका कहना है
देखिए डबल स्टैंडर्ड। इसका कहना है कि
खमेनी ने हिजाब करा लाला दिया। तो बबनी इो
हिजाब लगई लिए सऊदी अरब वाला। इन्हों पे
बोलो इनका पे ना बोलेगा बोलने का इशू मतलब
समझ रहे हैं ना सेम चीज है अगर हिजाब पे
आपको बोलना ही है तो ईरान के साथ-साथ सऊदी
अरब को भी लेंगे सऊदी अरब से तो तेल मिल
रहा है जब तेल बंद होगा रिश्ते टूटेंगे तब
हमारे अंदर का ज्ञान निकलेगा इसको ये सब
से दिक्कत है लेकिन उघारे घूमने से कोई
दिक्कत नहीं है मतलब ये है आजाद मॉडर्न
किसी भी देश का इंटरनल मैटर में वहां समझो
भाई ये सऊदी अरब है अपने यहां हिजाब करेगा
नहीं करेगा हमसे क्या मतलब है सऊदी अरब
में अभी ये कुछ दिन पहले गाड़ी चलाने का
लाइसेंस दिया हमारे देश में आपकी मर्जी आप
कर सकते हैं। आपकी मर्जी आप नहीं कर सकते
हैं। लेकिन अभी देश के समय सबसे बड़ी
समस्या क्या है? न्यूज़ चैनल की 20
कन्यायन नेशनल पॉलिसी और मीडिया का
नैरेटिव दोनों अलग होते जा रहा है। ये
किसी भी देश के लिए सबसे घातक होता है।
हमारी नेशनल पॉलिसी अरे भैया सरकार से
बोलो ना कि गरिया दे ईरान को। हम लोग भी
गरिया नहीं लगेंगे। नेशनल पॉलिसी कहीं और
जारी है और पब्लिक का नैरेटिव ही सब कुछ
और बैठा रहे हैं। सर यही होता है। अब किसी
भी फेल्ड कंट्री में क्या होता है?
बांग्लादेश में क्या हुआ? नेशनल पॉलिसी
कुछ और थी। मीडिया का नैरेटिव कुछ और था।
श्रीलंका में क्या हुआ? नेशनल पॉलिसी कुछ
और थी, नैरेटिव कुछ और था। पाकिस्तान
क्यों फेल्ड हुआ? नेशनल पॉलिटिक्स कुछ और
है। संविधान कुछ और कहता है। पब्लिक कुछ
और कह रही है। तो इन लोगों से थोड़ा बच के
रहने की जरूरत है। वरना ये लोग भी भारत को
चौबट कर देगा। हमारी नेशनल पॉलिसी है।
हमारा सरकार जिसके खिलाफ है। हम खिलाफ
रहेंगे। तुर्की के खिलाफ है। तुर्की के
खिलाफ रहेंगे। चाइना के खिलाफ है। खिलाफ
रहेंगे हम यहां पे। लेकिन मीडिया में बैठी
कन्याओं को पता नहीं किसने अधिकार दे दिया
कि ये लोग आके ना नॉलेज ना कुछ बकैती चालू
कर देते हैं। ईरान अमेरिका और इजराइल की
लड़ाई में भारत की नौसेना के ऊपर इस तरह
का बड़ा धर्म संकट हो गया। क्योंकि भारतीय
नौसेना ने मिलान एक्सरसाइज में और ईरान को
बुलाया था और हमारी ईस्टर्न नेवल कमांड ने
ट्वीट किया था ईरान के बारे में। बड़ा
अच्छा अच्छा बात किया था। ब्रिगेड ऑफ
फ्रेंडशिप वगैरह इंडियन नेवी को यहां
शामिल किया गया था। सब के लिए यहां पर
लेकिन जब युद्ध समाप्त हुआ ये युद्धाभ्यास
समाप्त हो गया तो ये विशाखापटनम से लौट
रही थी जहाज ईरान के लिए तब तक रास्ते में
युद्ध हो गया ये शिप जब जैसे इंडियन ओसियन
को पार ये बंगाल की खाड़ी को पार करती है
और बांग्लादेश श्रीलंका के बाहर रहती है
तब तक तब इसे यहां रुक कर श्रीलंका से
अंदर आने की अनुमति मांगती है डॉक करने के
लिए तब तक यहीं पर एक अमेरिकी पनडुबी ने
अमेरिकी पनडुबी ने इसे मार के डूबा दिया
अमेरिका का कहना है ये जाके हमला करता है
हमारे ऊपर इसके ऊपर कोई हथियार नहीं है
नियम नियम होता है कि कोई भी युद्ध अभ्यास
के लिए आया तो उस पे हथियार नहीं होगा। तो
हथियार नहीं हो गया आप। यहां डूबा गया। यह
भारत को हिमिलिएट करने के लिए कि आपके तट
के पास हमने डूबाया है और भारतीय नौसेना
के पास इसका डिस्ट्रेस सिग्नल पहुंचा गया।
तो भारतीय नौसेना से पहले श्रीलंका की
नौसेना पहुंची जब देना जहाज डूबा था तो।
ये भारत को अमेरिका हमेशा डिमिलिएट करता
है। हमेशा कुछ ना कुछ बोलता है। क्यों?
समझिए ध्यान से। क्योंकि 2016 में मोदी जी
कहे थे कि हमारी प्रायोरिटी है हिंद
महासागर। सोमालिया में भी अगर कुछ घुसपैठ
होगा तो हम जाके बचाएंगे। हमारी
प्रायोरिटी है हिंद महासागर। जयशंकर साहब
कहते हैं दुनिया का एकमात्र महासागर हिंद
महासागर जो किसी देश के ऊपर है हिंद
महासागर है। हम लोग ये कहते हैं कि हम लोग
गार्डियन ऑफ द सी है। ये पूरा हिंद
महासागर के हम गार्डियन हैं। पूरा हिंद
महासागर। तो भैया तो इसी के अंदर ये आता
है यहां पर। श्रीलंका नेवी ने श्रीलंका ने
कहा कि हम लोग ह्यूमिनिटी के साथ हैं यहां
पर और श्रीलंका ने इसे बचाया था। वहां के
लोगों को डिस्ट्रेस सिग्नल जब आया था
हमारा नहीं। अब आप सोचिए कि हिंद महासागर
में अगर कोई जहाज डूब रहा है तो रेड क्रॉस
और इंटरनेशनल रूल है कि अगर कोई जहाज
युद्ध में डूब रहा है या कोई सैनिक घायल
है तो उसे कोई भी देश बचाएगा। तो अब बताइए
हिंद महासागर में श्रीलंका पहले पहुंच रहा
है हम लोग से। अच्छा अगर श्रीलंका है तो
हमने ही तो बोला है कि ये गार्डियन ऑफ द
सी हम लोग हैं। यह प्रभाव दिखाता है। हमें
ये नहीं मतलब है कि उसके बचाने से ये होगा
या कुछ होगा। हम कहां पंचायती जाते हैं?
जहां हमारा प्रभाव है। तो पंचायती हम वही
कह सकते हैं कि हमारा प्रभाव जहां है। तो
ये प्रभाव को दिखाता है। 1971 याद कीजिए।
1971 में अमेरिका का सातवां बेड़ा आया था।
हम लोगों ने कोई वैल्यू नहीं किया था।
हमारे ऊपर परमाणु बम मारने आया था। तो ये
चीजें थोड़ी सी थोड़ी सी खराब हो जाती
हैं। हालांकि विदेश नीति में बड़ा नाजुक
चीज होता है। दोनों ओर से बैलेंस बना के
चलना कि इज़राइल अमेरिका क्योंकि ये दोनों
बड़ा अमेरिका बदतमीज़ देश है। आप अगर
मानवता के नाम पे हम बचाने जाएंगे ससुरा
पाकिस्तान को हथियार देगा। तो हम लोग बड़ा
नाजुक दौर पे चल रहे हैं। लेकिन हम क्या
सोचते हैं? इससे ज़्यादा इंटरनेशनल रिलेशन
में मायने रखता है। बाकी देश हमारे बारे
में क्या सोच रहे हैं? जैसे हम छोटा सा
बात बताते हैं कि खालिदा जिया बांग्लादेश
में इनकी मृत्यु हो गई। स्वाभाविक मौत से
मरी कोई इन्हें मारा नहीं। ये भारत के
खिलाफ रहती है। शेख हसीना भारत के साथ ये
भारत के पूरा खिलाफ रहती है। इसके मृत्यु
पे पीएम मोदी ने शोक बताया। जबकि ईरान
हमारा मित्र है। वहां 165 लड़कियों की
मृत्यु हो गई बम मार के। वो अमेरिका जिसका
पिन पॉइंट एक्यूरेसी होता है जहां चाहेगा
मिसाइल वहीं मारेगा तो फिर स्कूल पे कैसे
मिसाइल मार दिया और इस पर अभी तक किसी तरह
का ऑफिशियल शोक प्रकट नहीं किया गया है
जबकि ट्रंप की खुद की भतीजी ने मैरी ट्रंप
नाम है उसने कहा है कि दुनिया का कोई इसे
जस्टिफाई कर सकता है नहीं कर सकता है तो
ये विदेश नीति में हम लोग को बड़ा बैलेंस
बनाने का मतलब ये नहीं कि हम एक ओर से एक
ओर से हट जाए फिर भी बैलेंस ना ये तो एक
मानवता वाला चीज होता है और ये कौन सी
दोस्ती हो गई अमेरिका से कि अमेरिका की
दोस्ती की वजह से हम किसी के निधन पे भी
शोक ना व्यक्त कर सके। ये तो भारत की
संस्कृति है। लोग कहते हैं कि दुश्मन की
भी मृत्यु पे हम लोग को शोक व्यक्त कर
देना चाहिए। और यह दुश्मनी तो थी। हम लोग
क्या है? तुर्की को तो भर-भर के मदद दिए
थे लोग। हमारा दुश्मनी ही तो है तुर्की
वहां पे जब भूकंप आया था। एहसान फरामोस सब
भूल गया भारत की। आज भी भारत के खिलाफ
रहता है तुर्की। यहां आप देखिएगा ये अम
ईरान की नौसेना का वो बार-बार एक शब्द पूछ
रहा है। अ गेस्ट ऑफ इंडियन नेवी आर द
गेस्ट ऑफ इंडियन नेवी जो जहाज को मार के
डूबाया गया जिसमें हथियार नहीं था। तो वो
ससुरा दोस्ती के चक्कर में ना बड़ा
उटपटांग काम करता है। अमेरिका देखिए
बार-बार भारत को कैसे नीचा दिखा रहा है।
अमेरिका का ये ससुरा है वहां का डिप्टी
सेक्रेटरी ये कह रहा है दिल्ली में बैठ के
दिल्ली में बैठ के कह रहा है कि हम इंडिया
को चाइना की तरह मौका नहीं देंगे आगे
बढ़ने का कि अमेरिका का कंपटीिट बन सके। ई
ससुरा तुम मौका दोगे चट्टा कहीं का। हमको
मौका दिल्ली में बैठ के बोल रहा है। हमारी
मीडिया इससे सवाल नहीं पूछी। रोक के पूछना
चाहिए ससुरा तू दिल्ली से चल कैसे जाएगा?
तुम्हारे भरोसे हम लोग बैठे हैं। हमारे
यहां ई बोलती है कि प्रधान देखिए मोदी हैज़
ओपन हिज लेग फॉर इजराइल। मोदी ने इजराइल
के लिए टांग खोल दिया। ई ससुर ई का कौन है
ये? अमेरिका की पत्रकार है। आई अमेरिका का
देखिए यहां पे ट्रेजरी डिपार्टमेंट है।
छोटा डिपार्टमेंट है ट्रेजरी डिपार्ट। वो
कह रहा है कि हमने अमीर इंडिया को अलऊ
किया 30 दिन के लिए तेल खरीदने के लिए।
अलऊ किया 30 दिन के लिए। हमारे ये
पेट्रोलियम मंत्री जयदीप पुरी साहब यहां
पे 9 फरवरी को बोलते हैं कि 74 दिन का तेल
है हमारे पास। 74 दिन का 20 दिन के बाद 3
मार्च को कहते हैं कि 25 दिन का तेल है ये
भैया अब यह 74 दिन का था अब यह 25 दिन का
था ये क्या हो रहा है हम लोग किसकी बात
माने इस संसद में खड़ा बात माने कि ए एनआई
की रिपोर्टिंग की बात माने दोनों में से
बड़ा कंफ्यूजन की स्थिति हो गई है यहां पे
अमेरिका पे कभी भरोसा नहीं ऐसा कोई सगा
नहीं जिसे अमेरिका ने ठगा नहीं बार-बार
अमेरिका इंडिया को क्या मिला डेड इकॉनमी
डेड इकॉनमी बकायदा ही ट्रंप ट्वीट किया है
डेड इकॉनमी है जब यहां पर उसने
डीबोर्डिंग पॉलिसी लाया आया था जेल में
हथकड़ी लगा के भारतीयों को इसने डिवोट
किया था। यहां पर एच1 बी वीजा का रेट बढ़ा
दिया। किसी को भारतीयों को घुसने नहीं
दिया और कहा कि भारतीय इंजीनियरों के बदले
अमेरिकी इंजीनियरों को रखें। अमेरिका कभी
भारत का नहीं हो सकता है यहां पे। समझिएगा
दोस्ती और बॉस में अंतर होता है। हमारा
दोस्त पुतिन भी है। ईरान इजराइल सॉरी
रशिया है। रशिया कभी बोला कि जापान से मत
खरीदो। चाइना से मत खरीदो। अमेरिका से मत
खरीदो। दोस्ती का मतलब क्या होता है? भाई
हम अपना काम करेंगे। आप अपना काम कीजिए।
ईरान भी हमारा दोस्त है। दोस्ती का मतलब
क्या होता है? कि हम अपना काम कर रहे हैं।
आप अपना काम कीजिए। ये ससुरा दोस्ती के
नाम पे बॉस बनने लगते हैं सब। हमसे तेल
खरीदो। ईरान से मत खरीद। हम ईरान से तेल
नहीं खरीदते हैं। जबकि सस्ता पड़ता है।
हमसे तेल खरीदो। रूस से मत खरीद। रूस से
हमें सस्ता पड़ता है। ये दोस्त बन रहे हो
कि दोस्त के आड़ में बॉस बन रहे हो। तो
किसी भी देश को हम कहते हैं भारत से
खिलवाड़ करने की औकात नहीं होनी चाहिए
किसी को। किसी को इतना छूट नहीं देना
चाहिए। दोस्ती हो दोस्ती की तरह। हर चीज
की एक चीज़ लिमिट्स हैं। सम डिस्टेंस इज़
गुड फॉर हेल्दी रिलेशन। तो कुछ डिस्टेंस
मेंटेन करने की जरूरत है। भारत को एकदम
में पहले समझ गया है और भारत को अपने
आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। नहीं तो ये
दोस्ती के हार में बॉस वाला काम करने
लगेंगे सब जिस वजह से दिक्कत है। कहीं ना
कहीं हमें तो ऐसा लगता है कि सरकार अपने
जगह पे ठीक काम कर रही है। लेकिन हर सरकार
के लिए कुछ अधिकारी काम करते हैं।
ब्यूरोक्रेट्स बोलते हैं। डिप्लोमेट्स एंड
ब्यूरोक्रेट्स। ये लोग बहुत ज्यादा काम
करते हैं। यही सलाह देते हैं।
प्रधानमंत्री को, गृह मंत्री को, रक्षा
मंत्री को। ये सब कहीं ना कहीं ऐसा तो
नहीं हो रहा है कि कहीं अमेरिका या इजराइल
के प्रभाव में क्योंकि इन लोगों को प्रभाव
में लेना बड़ा मुश्किल है क्योंकि ये सब
जमीनी नेता है सब प्रभाव में नहीं आएंगे
लेकिन इन लोग को अधिकारी जो है सब इन लोग
का कोई ठीक नहीं है 100 करोड़ तुम लो 50
करोड़ तुम लो अमेरिका को वो तो कुछ जाता
नहीं है उन सब के पास पैसा है ऐसा भी हो
सकता है कि भारत के टॉप लीडरशिप के आड़
में ये लोग नीचे के पूरा पाया घसका दिए हो
कि हमारे हिसाब से बोलो ऐसा करो ऐसा नहीं
करो इसकी भी जांच होनी चाहिए क्योंकि ऐसा
भारत में हो चुका है रविंद्र सिंह के साथ
वो सीआई
रॉ में रहते हुए सीआईए के लिए काम कर रहे
थे। तो इसका भी काउंटर अटैक होना चाहिए और
हनी ट्रैप में बहुत सारे अधिकारी अपने फंस
रहे हैं। चाहे वो सेना का हो, डीआरडीओ का
हो, इसरो का साइंटिस्ट हनी ट्रैप में फंस
जाता है। एक वो सुंदर लड़की उसको मैसेज
करने लगती है। ये है वो उसके उसके प्रेम
में फंसाएगी सारा डाटा निकाल लेगी। तो इस
पे भी काम करने की जरूरत है भारत सरकार
को। हालांकि बहुत सारी चीजें बैलेंस बना
के चल रही है। भारत हमेशा से न्यूट्रल
रहने की कोशिश करता है। लेकिन अमेरिका ही
इतना बदतमीज़ है कि क्या कीजिएगा। अभी
ईरान का एक और जहाज लामन जहाज था। उसे
भारत ने अपने यहां डॉक करने का मौका दिया
और एक बूसर जहाज बुशर जहाज था उसे
श्रीलंका ने अपने यहां डॉक करने का मौका
दिया। ईरान ने भारत का धन्यवाद व्यक्त
किया है कि भारत इस मुसीबत की घड़ी में
ईरान के साथ है और हम पूरी दुनिया के साथ
हैं। हमारे शास्त्रों में पढ़ाया गया है
वसुधैव कुटुंबकम। हम लोग वो देश हैं जहां
हमारी संस्कृति है वसुधैव कुटुंबकम की।
दुनिया में हम युद्ध नहीं चाहते थे।
दुनिया ने युद्ध दिया। हमने दुनिया को
बुद्ध दिया था। हमसे क्या करेंगे? लेकिन
ऐसा ऐसा बवंडरे लेके रहता है सब कि क्या
कर सकते हैं हम लोग यहां? लेकिन इसी बीच
अच्छी खबर ये है कि हमने कनाडा के साथ 10
साल का डील कर लिया है यूरेनियम के लिए।
यूरेनियम कनाडा से हम ले लेंगे। कनाडा में
ट्रूडो की सरकार गिरने के बाद भारत और
कनाडा की से रिश्ते अच्छे बने हैं। नहीं
तो याद रखिए कि ईरान यही दो एक साल पहले
कनाडा में जब ट्रूडो थे तो कनाडा से हमारा
रिश्ता कितना खराब हो गया था। जी20 के
समिट में भी आया था तो हमारे यहां डिनर पे
नहीं आया था। तो इंटरनेशनल रिलेशन में देश
सर्वोपरि होना चाहिए। रिश्ते बनते हैं,
बिगड़ते हैं। कब आएगा, कौन जाएगा इससे
बेहतर नहीं होता है। लेकिन आत्मनिर्भरता
बहुत जरूरी है। भारत के ऊपर ये सब बिना
मतलब का दबाव बना रहे हैं। सब जरूर बहुत
जल्दी भारत भी इससे उभर जाएगा। हमें भी
बड़ा उम्मीद है। हालांकि यूरेनियम को हम
लोग येलो केक कहते हैं। दुनिया का सबसे
महंगा पदार्थ है। दुनिया का सबसे महंगा
क्यों है? क्योंकि 1 kg यूरेनियम 235 से।
238 नहीं 238 को काम का नहीं है। 235
यूरेनियम 235 1 kg में 27 लाख kजी कोयला
का ताकत होता है। यानी 27 लाख kजी कोयला
जलाइए और 1 kg यूरेनियम जलाइए सेम एनर्जी
मिलेगा। 27 लाख इतना है। तो इसीलिए
यूरेनियम दुनिया का सबसे महंगा पदार्थ है।
हम लोग ने कनाडा के साथ इसका डील कर लिया
है। जो बैचेस हैं आपके ज्योग्राफी हो गया,
वर्ल्ड मैप हो गया, फिजिक्स हो गया। सब 7
अप्रैल, 9 अप्रैल, 14 अप्रैल बिना मैप पढ़े
तो आप कोई जीएस बुझाने वाला नहीं है। वरना
मैप में अमेरिका किधर है, फिलीपीन किधर
है, फिलिस्तीन की तरह पगलाते रहेंगे। तो
ये सारे बैचेस आप लोग को बता दिए इनफेशन
बिहार दरोगा का भी बैचेस यूपीएससी बोरिंग
रोड और मुसलरपुर रोड और ऑनलाइन वाले बैच
में भी यूपीएससी स्टार्ट हो गया है। बहुत
जल्दी आपको जो अपने क्लास से यूपीएससी में
सेलेक्ट हुए हैं उन लोग से आपको मिलवाते
हैं। और सबसे जरूरी नीट जेई वाले बच्चे।
नीट वाले बच्चे और जेई वाले बच्चे इस बार
और बेहतर रिजल्ट देना है। चाहे वो आप 12th
में 11थ में हो, 12th में हो या ड्रॉपर
हो। नीट जेई 11 12 और ड्रॉपर वाले बैच
इंग्लिश मीडियम हिंदी मीडियम सारे बैच अभी
स्टार्ट हो गए हैं आप लोग के लिए। आप लोग
इस पे भी अब अपने हिसाब से अपने जरूरत के
हिसाब से एनरोल हो जाएंगे। आई होप आपको सब
टॉपिक समझ में आया होगा। नेक्स्ट टॉपिक
में हम बता देंगे कि कौन-कौन से हथियार
इजराइल, अमेरिका और ईरान युद्ध में यूज कर
रहे हैं और कैसे कौन-कौन से हथियार कितने
ज्यादा खतरनाक हैं। मिलेंगे नेक्स्ट क्लास
में। जय हिंद।